जिस तरह लोकसभा चुनावों के नतीजे आने से पहले सभी दलों के दफ़्तर में तैयारियां शुरू हो गई थीं, उसी तरह सोशल
मीडिया पर भी लोग अपनी राय के साथ हाज़िर हैं.
रुझान आते ही सोशल मीडिया पर लोगों के ट्वीट और कमेंट की बरसात हो गई है. ट्वीटर पर
#ElectionResults2019, #Verdict2019, #ModiAaRahaHai, #Amethi और #Smriti Irani जैसे ट्रेंड चल रहे हैं. चुनाव आयोग के मुताबिक इन रुझानों में बीजेपी 291 से ज़्यादा सीटों पर आगे चलते हुए बहुमत की तरफ़ बढ़ रही है, कांग्रेस करीब 50 सीटों पर आगे दिख रही है, वहीं अन्य दल 196 सीटों पर आगे है. हालांकि, ये शुरुआती रुझान हैं और नतीजों में बदलाव हो सकता है.
लेकिन, लोगों ने सोशल मीडिया पर चुटकियां लेनी शुरू कर दी है. कोई बीजेपी की बढ़त पर, कोई कांग्रेस और आप पर कमेंट कर रहा है तो कोई ईवीएम की बात कर रहा है.
एक ट्वीटर यूजर चौकीदार मित प्रजापति ने ट्वीट किया है, ''आप उम्मीदवार इस तरह हैं.''
अमेठी की सीट को लेकर भी खासी चर्चा है. यहां से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और बीजेपी नेता स्मृति ईरानी के बीच कड़ी टक्कर है.
सुनील पांडे ने ट्वीट किया है, ''अमेठी विश्व स्तरीय सीट बन गई है. देखें कौन जीतता है इटेलियन या ईरानी''.
यूजर एबी ने लिखा है, ''मुझे इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि एनडीए कितनी सीटें जीतती या यूपीए कितनी हारती है. मुझे तो बस ये जानना है कि राहुल गांधी अमेठी से हारने वाले हैं या नहीं.''
11 अप्रैल से 19 मई तक 7 चरणों में
लोकसभा की 542 सीटों के लिए चुनाव में कुल 8040 उम्मीदवार मैदान में उतरे
और अब 17वीं लोकसभा के गठन के लिए 23 मई यानी गुरुवार को मतगणना हो रही है.
यानी आज 8040 उम्मीदवारों की किस्मत का फ़ैसला होना है. चलिए देखते हैं कि कौन कौन से कद्दावर नेताओं की किस्मत का फ़ैसला होना है और इस
चुनाव में किन-किन सीटों पर सबकी निगाहें टिकी हैं.नरेंद्र मोदी. 2014 में मोदी ने आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को 3.3 लाख वोटों से हराया था. एक बार फिर नरेंद्र मोदी यहां से चुनाव मैदान में हैं और उनके ख़िलाफ़ कांग्रेस के अजय राय और सपा-बसपा-रालोद की शालिनी यादव खड़ी हैं.
2014 में बीजेपी के राघव लखनपाल ने कांग्रेसी उम्मीदवार इमरान मसूद को हराया था. सहारनपुर में कुल 56.74 फीसदी हिंदू, 41.95 फीसदी मुस्लिम जनसंख्या है. (2011 के जनगणना के अनुसार). इस लोकसभा सीट के तहत पांच विधानसभा सीटें बेहट, सहारनपुर नगर, सहारनपुर, देवबंद और रामपुरमनिहारन आती हैं. इनमें से दो पर बीजेपी, दो कांग्रेस जबकि एक पर समाजवादी पार्टी के विधायक हैं. लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान सहारनपुर के देवबंद में ही 7 अप्रैल को बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन की पहली संयुक्त रैली का आयोजन किया गया था. पहली बार अखिलेश, मायावती और अजित सिंह ने मंच साझा किया. बीजेपी ने एक बार फिर राघव लखनपाल को उतारा है तो सपा-बसपा-रालोद ने हाजी फजर्लुरहमान और कांग्रेस ने इमरान मसूद को टिकट दिया है.
कैराना
2014 में यहां से बीजेपी की जीत हुई थी लेकिन बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के निधन से खाली हुए इस सीट पर उप चुनाव में विपक्षी एकता के सहारे रालोद उम्मीदवार तबस्सुम हसन की जीत हुई. 2019 के चुनाव में सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन की वजह से बीजेपी के लिए 2014 का प्रदर्शन फिर से दोहराना एक बड़ी चुनौती है. सपा-बसपा-रालोद की वर्तमान सांसद तबस्सुम हसन के सामने बीजेपी ने यहां से प्रदीप चौधरी को तो कांग्रेस ने हरेंद्र मलिक को उतारा है.
बाग़पत
भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ से मौजूदा सांसद सत्यपाल सिंह यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं, आरएलडी से जयंत चौधरी जबकि, शिवपाल सिंह यादव की पार्टी ने चौधरी मोहम्मद मोहकम को अपना प्रत्याशी बनाया है.
देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की इस संसदीय सीट से उनके बेटे अजित सिंह कई बार चुनाव जीत चुके हैं लेकिन 2014 की मोदी लहर में बीजेपी ने यहां जीत का परचम लहराया और मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह सांसद चुने गए जबकि अजित सिंह तीसरे नंबर पर रहे.
इस बार यहां से उनके बेटे जयंत सिंह प्रत्याशी हैं जबकि खुद अजित सिंह मुज़फ़्फ़रनगर से चुनाव मैदान में हैं. अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी यहां से सपा-बसपा-रालोद के प्रत्याशी हैं. वहीं बीजेपी ने एक बार फिर सत्यपाल सिंह को टिकट दिया है जबकि कांग्रेस ने कोई भी प्रत्याशी नहीं उतारे हैं.
2008 में अस्तित्व में आई गाज़ियाबाद सीट पर 2009 से ही बीजेपी का वर्चस्व बना हुआ है. यहां से जनरल विजय कुमार सिंह वर्तमान बीजेपी सांसद हैं.
2014 में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर को 5.57 लाख वोटों से हराया था. सिंह को मोदी कैबिनेट में राज्य मंत्री बनाया गया. सिंह एक बार फिर बीजेपी प्रत्याशी हैं जबकि कांग्रेस की तरफ से डॉली शर्मा मैदान में हैं.
गौतमबुद्ध नगर
2014 के आम चुनाव में हेमा मालिनी यहां से बीजेपी सांसद बनी थीं. उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी को हराया था.
हेमा मालिनी एक बार फिर मैदान में हैं और इस बार सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने यहां से बीजेपी को रोकने के लिए कुंवर नरेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है. वहीं कांग्रेस ने महेश पाठक को उतारा है.
यह सीट भी 2008 में ही परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. 2015 में दादरी क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में हुई मोहम्मद अख़लाक़ की हत्या मामले को लेकर यह लोकसभा सीट चर्चा में रही है. 2009 में यहां पहली बार लोकसभा चुनाव हुए जिसमें बसपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की.
यहां से वर्तमान में सांसद बीजेपी के डॉ महेश शर्मा हैं. इस बार यहां से महागठबंधन से बीएसपी प्रत्याशी सतवीर नागर और कांग्रेस के डॉ. अरविंद कुमार सिंह मैदान में हैं.
इस सीट पर गुर्जर वोटरों की संख्या अधिक है. यहां से बीजेपी की तरफ से एक बार फिर डॉ. महेश शर्मा मैदान में हैं जबकि सपा-बसपा-रालोद के प्रत्याशी सतवीर नागर और कांग्रेस की तरफ से डॉ. अरविंद कुमार सिंह मैदान में हैं.